शानदार कॉमेडियन जॉनी वॉकर का नहीं था, जॉनी वॉकर से कोई रिश्ता

’….तेल चंपी…..तेल चंपी…..सिर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए….’, ‘जरा हट के जरा बच के ये है बॉम्बे मेरी जान’, ‘जाने कहां मेरा जिगर गया जी’ जैसे सुपरहिट गानों पर झूमने वाले जॉनी वॉकर शराब पिए हुए होते थे या नहीं, इस पर काफी बहस होती रही है। लेकिन सच बात ये है कि वह नहीं पीते थे। बिना पिए ही शराब की जबर्दस्त एक्टिंग करते थे। साठ के दशक के काली सफेद फिल्मों के शानदार कॉमेडियन जॉनी वॉकर बिना पिए ही शराबी के किरदार में डूब जाते थे। जॉनी वॉकर का जन्म 11 नवंबर, 1926 को इंदौर में हुआ था। आज उनके जन्मदिन पर बता रहे हैं कैसे हुई थी इस मजेदार शख्सियत की फिल्मों में एंट्री।

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जॉनी वॉकर अपने पिता के साथ मुम्बई पहुंचे और सबसे पहले इन्होंने आर्मी कैंटीन में नौकरी कर ली। फिल्मों में कुछ करने का अरमान लेकर जानकारी हासिल करने के लिए उन्होंने बस कंडक्टर की नौकरी भी की। बचपन से ही जाॅनी वॉकर को कॉमेडी करने का शौक था। जब वे फेमस नहीं थे तब भी लोगों की नकल उतार कर सबको हंसाया करते थे। सन 1951 में उन्हें देव आनंद के साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म का नाम था ‘बाजी’ जिसे गुरुदत्त निर्देशित कर रहे थे, लेकिन पहले गुुरुदत्त ने सक्रीन टेस्ट में इन्हें मना कर दिया था।

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गुरुदत्त को जब इनसे मिलवाया गया तो वह इनका नाम ही नहीं समझ पाए। फिल्म में जो करेक्टर और इनका नाम बदरुद्दीन, वहा आपस में मेल नहीं खा रहे थे। गुरुदत्त इस असमंजस पर हंस दिए और सोचने लगे। उस समय उनकी निगाह उनके सामने रखी शराब ’जाॅनी वाॅकर’ पर पड़ी, उनके मुंह से निकला जाॅनी वाॅकर, बस उसी समय से इनका नाम जाॅनी वाॅकर पड़ गया। फिल्म बाजी के लिए जॉनी को अभिनेता बलराज साहनी ने गुरुदत्त से मिलवाया था। इसके बाद ही गुरुदत्त ने उन्हें एक सड़क छाप शराबी का किरदार दिया।

वह शराबी जो नहीं पीता था शराब
Johnny Walker

 

अपने 35 साल के फिल्मी करियर में करीब 300 से ज्यादा फिल्मों में इन्होंने काम किया। उनकी यादगार फिल्में ‘हमसफर’, ‘आर पार’, ‘शहीदे आजम भगत सिंह’, ‘श्रीमती 420’, ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’, ‘पैगाम’, ‘रिक्शे वाला’, ‘उत्सादों का उस्ताद’, ‘आदमी’, ‘नया दौर’, ‘मेरे महबूब’, ‘हंगामा’, ‘धोती-लौटा और चैपाटी’, ‘मेरा दोस्त मेरा दुश्मन’, ‘शान’ थीं और इसके अलावा उनकी आखिरी फिल्म ‘चाची-420’ थी।

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जॉनी ने कभी भी अपने कॉमेडी में किसी का मजाक नहीं उड़ाया और ना ही कोई अश्लीलता दिखाई। शराबी किरदार निभाते थे लेकिन कभी शराब का सहारा नहीं लिया और ना ही उन्हें रियल लाइफ में शराब पंसद थी। सन 1957 में निर्देशक वेद महान ने जॉनी वाकर नाम की कॉमेडी फिल्म बनाई। जिसमें जॉनी लीड किरदार में थे। ये फिल्म नटराज प्रोडक्शन में बनाई गयी थी, जिसे लोगों ने पसंद किया।

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जॉनी वॉकर मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में पैदा हुए। इनका असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी था। बाॅलीवुड के महान कॉमेडियन जॉनी वाकर ने 29 जुलाई 2004 को मुंबई में आखिरी सांस ली। उस समय उनकी उम्र 82 साल की थी।

चीयर्स डेस्क

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