यूपी में सस्ती होगी देशी शराब

यूपी में सहारनपुर, कुशीनगर, बाराबंकी, कानपूर ये वो जिले है जो पिछले एक वर्ष से चर्चा में रहें हैं।  वजह जहरीली शराब से हुई मौतें।  इन सभी जिलों में जो मौतें हुई थी उसके पीछे देशी शराब का नाम आया था।  बाराबंकी में जो मौतें हुई उसमे तो शराब को सरकारी दुकान से ही ख़रीदा गया था। देशी शराब के महंगे होने के कारण लोग सस्ती कच्ची शराब को खरीद लेते थे और अपनी जान को जोखिम में दाल देते थे। इन्ही सब घटनाओं से सबक लेते हुई यूपी सरकार ने नई शीरा निति को मंजूरी दे दी हैं।

वर्ष 2019-20 में देशी मदिरा के लिए कुल शीरे का 18 प्रतिशत आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। चीनी मिलों के चलने के बाद शीरे की उपलब्धता और मदिरा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर आरक्षण के प्रतिशत में परिवर्तन भी किया जा सकेगा। नई शीरा नीति से देशी शराब सस्ती होने का अनुमान है।

गुणवत्ता तथा मानक युक्त वैध देशी शराब सस्ते दामों पर उपलब्ध कराना जन स्वास्थ्य एवं जनहित में आवश्यक है। सस्ते दामों पर वैध शराब उपलब्ध नहीं होने पर अवैध मदिरा सेवन से जनहानि की आशंका बनी रहती है। नई शीरा नीति इसी को ध्यान में रखकर बनाई गई है। वर्ष 2019-20 में 500 लाख क्विंटल शीरे का उत्पादन होने का अनुमान है। देशी मदिरा के लिए उत्पादित शीरे का 18 प्रतिशत आरक्षित करने का प्राविधान किया गया है, जबकि 2018-19 में 12.50 फीसदी शीरा आरक्षित किया गया था। बाद में इसे 16 फीसदी कर दिया गया था। अब शीरे के कुल उत्पादन के आधार पर सभी मिलों को समान रूप से आरक्षित शीरा देना होगा। कॉरपोरेट समूह की मिलें आरक्षित शीरे की आपूर्ति अपने ग्रुप की एक या एक से ज्यादा मिलों से कर सकेंगी। देशी शराब की आपूर्ति बाधित होने पर यह सुविधा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएगी।

पूर्वांचल में समूह की एक मिल से शीरा आपूर्ति जरूरी
पूर्वांचल में आसवनियों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इन्हें कॉरपोरेट की मिलों से अपनी कम से कम एक मिल से आरक्षित शीरे की आपूर्ति करना अनिवार्य होगा।

चीयर्स डेस्क 

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