मीठी है लेकिन स्मूथ नहीं है टुबर्ग बियर

भारत और विशेषकर उत्तर भारत के बाजारों में पिछले कई वर्षों से टुबर्ग बियर बाजार में छाई हुई है और देश के बियर बाजार पर करीब 18 फीसदी कब्जा टुबर्ग का है और कुल मिलाकर इसकी मदर कंपनी चाल्र्सबर्ग भारत के कुल बियर बाजार का दो तिहाई हिस्से पर कब्जा जमाए हुए है। इन कम्पनियों ने भारत में टुबर्ग का दबदबा बना हुआ है। इसका एक कारण किंगफिशर के बाजार का चैपट हो जाना। किंगफिशर की घटिया क्वालिटी के चलते ही इन दोनों बियर ने बाजार पर कब्जा जमा लिया।

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टुबर्ग दुनिया के करीब 31 देशों में बिकती है, टुबर्ग की कई वैराइटी हैं जिनमें टुबर्ग ग्रीन, टुबर्ग लेमन, टुबर्ग क्रिसमस, टुबर्ग गोल्ड, टुबर्ग रेड, टुबर्ग ट्विस्टेड , टुबर्ग ब्लैक और टुबर्ग फाइन फेस्टिवल। टुबर्ग फाइन फेस्टिवल ही ऐसी बियर है जिसमें सबसे अधिक मात्रा में अल्कोहल पाया जाता है। टुबर्ग दरअसल डेनमार्क की कम्पनी की बियर है जो बाद में स्वीडिश ब्रेवरी के जिम्मे चली गई। टुबर्ग ग्रीन को यूरोप में काफी लोकप्रियता मिली जहां देखते ही देखते ये बाजार पर छा गई। खासतौर पर रूस में भी इसे बहुत कामयाबी मिली। सबसे पहले टुबर्ग रेड को 1875 में ब्रिव किया गया था यानी तैयार किया गया था।

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लेकिन भारत में जो टुबर्ग मिलती है वह न रेड है और न ग्रीन, संभवतः यह टुबर्ग का सबसे निम्नस्तरीय वैरायटी है जो यहां बेची जा रही है और भारतीयों के मुंह इसलिए लग गई कि दूसरी बियर से मीठी होती है। इस कारण युवा वर्ग इसे बहुत पसंद करता है। मीठे होने के अलावा ये ठंडा पन भी लिए होती है, बियर की तुर्शी इसमें नाममात्र होती है। यहां मिलने वाली टुबर्ग बियर इस मामले में भी अलग है कि इसका स्वाद मीठा और ठंडा तो होता है लेकिन एसिडिटी करने के मामले में यह अपनी ही कम्पनी की दूसरी बियर चाल्र्सबर्ग से आगे है। टुबर्ग पीने वाले दर्जनों उपभोक्ताओं से चियर्स डाॅट काॅम की हुई बातचीत में निष्कर्ष निकला कि टुबर्ग पीने वाले पेट की एसिडिटी के शिकार होते हैं।

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इस बियर में एक और खराबी है कि मुंह में इसका स्वाद शायद मीठे होने के कारण ही स्मूथ नहीं रह पाती है और जो फर्क बोतल बंद पानी और आरओ वाटर में होता है लगभग वही फर्क चाल्र्सबर्ग और टुबर्ग में होता है। टुबर्ग इस मामले में फिसड््डी नजर आती है जबकि कंपनी एक ही है, दाम में भी कोई खास फर्क नहीं है, टुबर्ग 145 रुपए की है और चाल्र्सबर्ग 160 रुपए की केन है। यूपी में इसके दाम 145 रुपए से शुरु होकर 190 रुपए तक जाते हैं। यूपी के बाजारों में टुबर्ग ग्रीन और ब्लैक के साथ साथ कुछ अन्य ब्रांड भी मौजूद हैं।

टुबर्ग के बिकने का एक और कारण कंपनी की रणनीति है, वह यह है कि जब कोई उपभोक्ता चाल्सबर्ग मांगता है तो दुकानदार पहले उपभोक्ता को टुबर्ग की अच्छाईयां गिनाने लगता है। पहले वह इसे ही बेचने की कोशिश करता है। एक तरह से चाल्र्सबर्ग के सहारे ही यह बियर यहां बिक रही है।

चीयर्स डेस्क

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