जिन्ना की कमसिन बीवी की तन्हाई

मुम्बई की मशहूर वाडिया फैमिली, पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की बेटी दीना वाडिया के बेटे नुस्ली वाडिया की फैमिली। नेस वाडिया, नुस्ली वाडिया के बेटे, कुछ समय पहले प्रीटि जिंटा के दोस्त हुआ करते थे। वाडिया ग्रुप वाली इस फैमिली की धाक बीसवीं सदी की शुरुआत में भी बड़े धमक वाली थी।

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दीना वाडिया के नाना मशहूर कारोबारी सर दिनशा पेटीट। बॉम्बे में पारसी लॉबी के मुख्यिा की हैसियत थी उनकी। तमाम कांग्रेसी नेता भी उनके यहां आते जाते थे। उनके घर का शानदार फ्रेंच स्टाइलिश फर्नीचर और ईरानी कालीन। रहन सहन एकदम यूरोपियन। बच्चों को संभालने के लिए इंग्लिश आय रहती थी और छुट्टियां यूरोप में गुजरती थीं।

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जिन्ना जिनकी उस समय चालीस के करीब की उम्र थी। वकालत और नेतागीरी में तेजी से उभर रहे थे। कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन के बाद तो वह युवा नेताओं के पोस्टर बॉय हो गए थे। गांधी उन्हें देश की हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक और भविष्य बताते थे और जिन्ना अपना भविष्य देख रहे थे दिनशा की बेटी रूटी में। दिनशा के घर में जिन्ना का आना जाना था। वहीं उन्होंने रूटा को देखा था और उस पर मर मिटे थे। मगर एक पेच था, वह था रूटी की उम्र। दोनों की उम्र में 25 बरस का फासला था। यानी कि जिन्ना रूटी के बाप दिनशा से सिर्फ तीन साल छोटे थे।

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लेकिन जो होना था, वह हुआ और 1918 मेंरूटी ने जिन्ना से निकाह करने की खातिर धर्म बदल लिया। मरियम बन कर निकाह पढ़वा लिया। इस शादी से पूरी बम्बई में हलचल मच गई और रूटी के परिवार ने उन्हें छोड़ दिया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद रूटी इस शादी से भाग खड़ी हुई, उन्हें जिन्ना में वो सब नहीं मिला, जिसकी ख्वाहिश थी। सरोजनी नायडू जैसे वरिष्ठ मित्रों के दखल के बाद रूटी लौटीं मगर शादी चल नहीं रही थी।

तब रूटी की जिंदगी में शामिल होती है शराब। हालांकि शराब पीने से पहले उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी रुचि लेने की कोशिश की। लेकिन मन न लगा। अपनी दोस्तों के बीच वक्त गुजारना चाहा, लेकिन तन्हाई कम नहीं हुई। शराब ने ही उन्हें सहारा दिया। लेकिन इस शराब भी बहुत दिनों तक उनकी दोस्त न रह सकी और उम्र में 20 फरवरी 1929 को मर गईं। महज़ 29 साल पहले 20 फरवरी 1900 को ही तो वह पैदा हुई थीं।

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इस शादी में गड़बड़ ये हो गई थी क्योंकि रूटी जिन्ना में एक हीरो देखती थीं। जिन्ना खुद बेहतरीन स्काॅच पीते थे और ड्राइंगरूम में शराब की चुस्कियां लेते हुए तकरीरें करते। पूरे देश में वह लोकप्रिय हो रहे थे लेकिन रूटी से खुलकर प्यार का इजहार नहीं करते थे तो रूटी को लगा कि इस शख्स की हकीकत कुछ और थी। जिन्ना प्यार के मोर्चे पर भी रिजर्व रहे। उनका पूरा ध्यान पॉलिटिक्स पर था। यही हाल उनके प्रतिद्धंदी नेहरू का भी था। उनके मोहक व्यक्तित्व के पास कमला नेहरू के लिए समय नहीं था।

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जिन्ना और रूटी में बस एक आदत ही काॅमन थी। दोनों को ही घुड़सवारी का शौक था। मगर वकालत की बड़ी व्यस्तता जिन्ना इसके लिए भी वक्त नहीं निकाल पाते। बाकी कुछ भी एक दूसरे से नहीं मिलता था। सब कुछ एक दूसरे से भिन्न। सार्वजनिक जीवन में दोनों यूं पेश आते जैसे सब कुछ ठीक है। चल रहा है। जिन्ना तकरीर कर रहे हैं और रूटी मंच पर संजीदगी बैठी हैं। पति के घंटों लंबे भाषण सुनतीं। जिन्ना को सेक्स से भी कोई खास रुचि नहीं थी। आलम यह कि रुटी से उनके बेटी हुई दीना। जिसका नाम भी बरसों तक नहीं रखा गया। वो आयाओं के हाथ पल रही थी और जिन्ना पाकिस्तान बनाने में मसरूफ थे।

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जिन्ना खोजा मुस्लिम थे जिनकी सब हरकतें इस्लाम के खिलाफ थीं। वो उम्दा व्हिस्की पीते थे। सुअर का मांस खाते थे। महंगे विलायती सूट पहनते थे। पाकिस्तान बनने की प्रक्रिया में उन्होंने शेरवानी और पायजामा पहना। कुछ लोगों का मानना है कि रुटी जिंदा होती तो देश नहीं बंटता। रूटी के जाने के बाद जिन्ना भावनात्मक रूप से सूख चुके थे और उन्हें बस एक ही जिद पर अड़े रहे। एक ऐसी जमीन, जिसके सबसे बड़े नेता वह स्वयं हों। कोई गांधी या नेहरू नहीं, फिर इसके लिए चाहें उन्हें इस्लाम का नारा और सहारा ही क्यों न लेना पड़ा हो। तथ्य पैंगविन से शीला रेड्डी की छपी किताब ’मिस्टर एंड मिसेज जिन्ना’ से लिए गए हैं।

चीयर्स डेस्क


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