क्या महाराष्ट्र में पीने के पानी की समस्या दूर कर पाएगी नई सरकार?

भारत की आर्थिक राजधानी महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना व बीजेपी में उठा पटक मची हुई थी। लेकिन आज शनिवार को सारे कयासों को ख़त्म करते हुए एनसीपी और बीजेपी ने साथ मिलकर सरकार बना ली हैं। देवेंद्र फण्डवनीस एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और एनसीपी के अजीत पवार डिप्टी सीएम का पद संभालेंगे। जहां कल तक शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रही थी। शिव सेना के उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के रूप में घोषित भी कर दिया गया था वही रातभर में ही एनसीपी ने अपना समर्थन शिवसेना से वापस लेते हुई भाजपा को दे दिया और अब महाराष्ट में भाजपा की सरकार हैं।  मामा मारीच की नगरी कहे जाने वाले राज्य महाराष्ट्र में कुछ भी संभव हैं।  जिन्हे नहीं पता उन्हें बता दे की मारीच वही शख्स हैं जिनकी मदद से रावण ने सीता जी का हरण कर लिया था। इस समय महाराष्ट्र में भी माया ही चल रही हैं, अब देखना होगा कि सरकार बनाने से लेकर उसे चालने तक में किस तरह की राजनीति देखने को मिलती हैं।

क्या महाराष्ट्र में पीने के पानी की समस्या दूर कर पाएगी नई सरक़ार?

महाराष्ट्र की गिनती देश के अगड़े प्रदेश के रूप में की जाती है। महाराष्ट्र का भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान हैं। हाल ही में केन्द्रीय एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) की जांच में  मुंबई के नल के पानी को सबसे साफ़ और पीने योग्य बताया गया था।  लेकिन महाराष्ट्र में सिर्फ मुंबई ही नहीं और भी जिले हैं जहां नल के पानी की बात छोड़िए नल ही नहीं हैं।  महाराष्ट्र के इस चुनाव में पीने को पानी को लेकर बहुत सी बयानबाजी हुई थी। जिसमे कोई साफ़ पानी देने की बात करता रहा तो किसी ने घर में आरओ लगवाने का वादा कर दिया।

क्या महाराष्ट्र में पीने के पानी की समस्या दूर कर पाएगी नई सरक़ार?

इसी साल जून में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के कई गॉव जल संकट से जूझ रहे थे।  आलम तो यह था की लोग कीचड़ से पानी निचोड़ कर पी रहे थे। महाराष्ट्र के ही यवतामल ज़िले में स्थित आजंति गांव के लोगों को पानी की तलाश में हर रोज 2 –3 किलोमीटर चलना पड़ता है।  उनका पुरे दिन का बड़ा हिस्सा पीने का पानी लाने में ही गुजर जाता हैं।

कुछ ऐसा ही हाल विदर्भ के अकोला जिले के वरखेड देवधरी गांव का है। गांव की आबादी करीब 850 है। गांव में काफी घरों पर ताले लटके हुए हैं। दरअसल गांव के काफी लोग पलायन करके मुंबई, पुणे और गुजरात की तरफ निकल गए हैं।  गांव में पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है। गांव में सिर्फ एक हैंडपंप काम कर रहा है। उसमें घंटों मशक्कत करने के बाद एक बाल्टी पानी आता है।

क्या महाराष्ट्र में पीने के पानी की समस्या दूर कर पाएगी नई सरकार?

महाराष्ट्र का लातूर जिला जिसने प्रदेश को 9 साल तक मुख्यमंत्री (विलासराव देशमुख) दिया। वहां की हालत और भी बत्तर हैं।  लातूर में यहा आलम हैं की वह पानी बाटने के पुलिस बंदोबस्त करना पड़ता हैं लातूर के सारे नल सुख गए हैं अंडरग्राउंड वाटर लगभग ख़त्म हो चूका हैं।

चीयर्स डेस्क 

loading...
Close
Close