जानिए पिछले साल सबसे ज्यादा पी जाने वाली विदेशी शराब

भारत में विदेशी सिंगल माल्ट व्हिस्की की मांग में पिछले वर्ष 2018 में लगभग साढ़े पांच गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। कुछ साल पहले तक भारत में विदेशी सिंगल माल्ट मात्र 23.1 मिलियन बोतल का आयात प्रतिवर्ष होता था जो 2018 आते आते 112.6 मिलियन बोतल प्रतिवर्ष हो गया। लेकिन ब्रेक्जिट से इस आयात पर प्रभाव पड़ सकता है।

क्या ब्रेक्जिट से शराब के आयात पर भी कोई प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल ब्रिटेन को ब्रेक्जिट से कुछ समय के लिए छुटकारा मिल गया है। ब्रिटिश टैक्स डिपार्टमेंट एचएमआरसी के आंकड़े कहते हैं कि भारत, फ्रांस और अमेरिका में 2018 में व्हिस्की की मांग काफी बढ़ी है। ब्रेक्जिट को लेकर उद्योग जगत से जुड़े सभी लोग परेशान हैं कि ब्रेक्जिट के बाद आयात निर्यात की शर्तें क्या होंगी और कैसे व्यापार होगा। शराब उत्पादन करने वाली कंपनियां भी इसके कारण परेशान हैं।

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इसका कारण सिंगल माल्ट व्हिस्की की बढ़ती मांग है। भारत में सिंगल माल्ट व्हिस्की की मांग में तो जबर्दस्त उछाल आया है जहां 23.1 मिलियन बोतल की मांग बढ़कर 2018 में 112.6 मिलियन बोतल तक पहुंच गई। इसी प्रकार फ्रांस और अमेरिका जैसे देश जो स्काॅच पीने के लिए विख्यात हैं, वहां सिंगल माल्ट की मांग में 9.4 मिलियन बोतल के आयात में बढ़ोत्तरी हुई है। लेकिन जर्मनी में 10 तथा स्पेन में 4.5 मिलियन बोतल के आयात में कमी आई है। स्काॅच व्हिस्की एसोसिएशन के कर्ताधर्ताओं का कहना है कि ये ठीक है कि दिन पर दिन सिंगल माल्ट की मांग बढ़ रही है लेकिन इसे इतना आसान भी नहीं समझना चाहिए कि इस पर खुशी मनाई जाए।

इस एसोसिएशन के लोगों का कहना है कि ब्रेक्जिट डील के बिना अलग नहीं होना चाहिए जब तक कि इसके लिए बाकायदा ट्रेड नियम कानून औपचारिक रूप से तैयार न कर लिए जाएं। क्योंकि अगर ये नहीं हो पाया और ब्रेक्जिट लागू हो गया तो अचानक सिंगल माल्ट के आयात पर तत्काल कुप्रभाव पड़ेगा और शराब उद्योग घाटे में चला जाएगा। भारत जैसा नया बाजार भी समाप्त हो सकता है।

चीयर्स डेस्क

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