दो दर्जन मरे तो पड़ने लगे छापे, पकड़ी जाने लगी शराब

जैसा हमेशा होता है कि जब कहीं जहरीली शराब से लोग मरते हैं, तो अवैध शराब के खिलाफ सघन छापेमारी चलती है, उसके बाद सब कुछ टांय टांय फिस्स। इस बार भी वैसा ही हो रहा है। बाराबंकी में अवैध जहरीली शराब से 23 लोगों की मौत के बाद प्रयागराज में आबकारी विभाग की नींद टूटी और वहां के थरवई थाना क्षेत्र में लंबे समय से बन रही अवैध शराब की सूचना पर छापेमारी की गई। बहमलपुर गांव की छापेमारी करने गई आबकारी विभाग की टीम को ग्रमीणों ने दौड़ा लिया।

सूत्रों के अुनसार दोनों पक्षों की तरफ से काफी देर तक धींगा मुश्ती होती रही। पत्थर बाजी भी हुई। लाठी डंडो का भी प्रयोग हुआ। पुलिस और आबकारी विभाग ने हमला करने वालों में से एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी कर लिया। आबकारी विभाग को जब अतिरिक्त पुलिस फोर्स मिली तो उसने आगे की कार्रवाई की और करीब 55 लीटर कच्ची अवैध शराब यहां से पकड़ी। दर्जनों भट्ठियों  को यहां पर नष्ट किया गया। आयोध्या में भी कच्ची अवैध शराब पकड़ी गई। चैरे बाजार में दो दुकानें बिना लाइसेंस के ही चल रही थीं। दोनों को सील कर दिया गया है।

इसी प्रकार अम्बेडकर नगर में करीब 500 लीटर अवैध कच्ची शराब पकड़ी गई है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डिप्टी एसपी के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की और जहांगीरगंज से करीब पांच सौ लीटर देशी शराब पकड़ी। बांदा में 190 लीटर अवैध शराब बरामद की गई है। यहां के चिल्ला थाना के अंतर्गत छापेमारी की गई तो यहां कफी मात्रा में भटिटयां भी पकड़ी गईं जिन्हें नष्ट कर दिया गया है।

यूपी के अन्य स्थानों से भी अवैध कच्ची देशी शराब बरामद होने और पुलिस तथा आबकारी विभाग की टीमों की छापेमारी की सूचनाएं चीयर्स डाॅट काॅम को प्राप्त हो रही हैं। लेकिन सवाल यही है कि जब कोई इस प्रकार की घटना होगी, यानी कि दर्जन दो दर्जन बेकसूर लोग अपने प्राणों की आहुति देंगे, तब जाकर पुलिस और आबकारी विभाग चेतेगा। कुछ दिन इसी प्रकार के अभियान चलाएगा और उसके बाद फिर अगली घटना की प्रतीक्षा में चैन से बैठ जाएगा।

अगर इस प्रकार के अभियान नियमित रूप से जनपदों में चलने लगें और पुलिस तथा आबकारी विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारी थोड़ी सी भी कर्मठता से कार्य करने लगें तो यूपी में अवैघ कच्ची देशी शराब बनना ही बंद हो जाए। लेकिन ऐसा कभी होगा, वर्तमान कार्यप्रणाली से तो ये संभव नहीं लगता है। क्योंकि पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के मंुह में लग चुके भ्रष्टाचार के खून से अवैध शराब को जो सिंडीकेट चल रहा है, उसके बंद होने की उम्मीद बहुत कम रह गई है।

चीयर्स डेस्क

loading...
Close
Close