भला कौन भूल सकता है ’शराबी’ के नत्थू लाल की मूंछों को

मूंछे हों तो नत्थू लाल जैसी….फिल्म ’शराबी’ का यह डाॅयलाग इतना मशहूर हुआ था कि हर कोई नत्थू लाल जैसी मूंछे रखने को उन दिनों बेताब नजर आ रहा था। जिस कलाकार पर यह मूछें  लगाई गई थीं, वह थे मुकरी। जी हां, बाॅलीवुड में एक मुकरी हुआ करते थे। एवरग्रीन कलाकार थे। यह वही थे जिन पर फिल्म अमर अकर एंथेनी का मशहूर गाना ’तय्यब अली प्यार का दुश्मन हाए हाए….’ गाना शूट हुआ था।

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मुकरी ने अपने दौर के तकरीबन सभी सुपरस्टार्स के साथ काम किया लेकिन उनकी मजेदार जोड़ी जमी अमिताभ बच्चन के साथ। मुकरी का कद छोटा था, वहीं अमिताभ काफी लंबे थे। इसलिए पब्लिक को इनकी जोड़ी बहुत पसंद आती थी। दोनों ने ‘शराबी’ (1984) के अलावा भी कई फिल्मों में काम किया।
लोग भले ही एक बार को मुकरी का नाम भूल जाएं लेकिन जैसे ही किसी से भी फिल्म शराबी के नत्थूलाल के बारे में पूछेंगे, उनके चेहरे पर एक चैड़ी सी स्माइल आ जाएगी। फिल्म ‘शराबी’ में अमिताभ बच्चन मुकरी को देखकर एक डायलॉग बोलते थे, वो डायलॉग था ‘मूंछें हों तो नत्थूलाल जी जैसी हों, वरना न हों।’ हालांकि तब दोनों में से किसी को नहीं पता था कि ‘नत्थूलाल’ का ये किरदार इतना फेमस हो जाएगा। इस डायलॉग ने मुकरी को इतनी मकबूलियत दी कि मनमोहन देसाई ने अपनी फिल्म ‘जादूगर’ (1989) में मुकरी का ‘शराबी’ वाला फेम कैश करने के लिए उनके किरदार का नाम नत्थूलाल ही रखा। लेकिन वो लोगों की यादों का हिस्सा नहीं बन पाए।

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मुकरी बेहद सीधे सादे आदमी थे। वह पढ़ लिखकर जब बड़े हुए तो एक मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए रख दिए गए। वहां वह पढ़ा तो रहे थे लेकिन उनका मन नहीं लगता था। एक बार की बात है कि जब उनको पता चला कि उनके क्लासमेट दिलीप कुमार फिल्मों के बड़े कलाकार बन चुके हैं। हीरो हो गए हैं तो उनसे मिलने के लिए मुकरी छटपटाए। जब मिले तो अपनी बात बताई तो दिलीप कुमार की सिफारिश पर उन्हें फिल्म ’प्रतिमा’ में काम करने को मिल गया। इस फिल्म के हीरो दिलीप कुमार ही थे। उसके बाद तो उनकी मांग बढ़ती ही चली गई और ‘प्रतिमा’ से शुरुआत करने के बाद मुकरी दिलीप कुमार के साथ फिल्म ‘आन’ में भी दिखे।

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मुकरी ने करीब पांच सौ से अधिक फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें सबसे अधिक लोकप्रियता शराबी फिल्म से ही मिली जिसमें उनकी मूंछों की अमिताभ बच्चन ने तारीफ की है। शराबी फिल्म की कहानी में अमिताभ के किरदार को निखारने और बनाने में मुकरी का काफी योगदान बताया जाता है। हालांकि मुकरी ने जीवन भर कभी शराब नहीं पी लेकिन शराब पीने वालों के साथ काम बहुत किया। इसीलिए उनकी हर हरकत उन्हें पता थी। मुकरी का पूरा नाम मोहम्मद उमर मुकरी था और वह कोंकणी मुसलमान थे। उन्होंने 1945 से अपना फिल्मी सफर शुरु किया था जो चार सितम्बर 2000 को मुम्बई में खत्म हुआ जिस दिन उनकी मौत हो गई।

चीयर्स डेस्क

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