सेहत के लिए अनुकूल नहीं पटना का भूजल

अगर आप पटना में रहते हैं तो ये खबर आपके काम की है। गंगा, सोन और पुनपुन नदी के किनारे बसे पटना जिले के 1198 वार्डों का भूजल सामान्य रूप से सेहत के लिए अनुकूल नहीं है। इन वार्डो में डीप बोरिंग और नई तकनीक से जलापूर्ति की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को सौंपी गई है।

तय समय पर पूरा नहीं हो सका काम

मुख्यमंत्री नल-जल योजना 31 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन अब तक जिले के 4354 वार्डों में मात्र 169 का कार्य पूरा हो सका। जिले में नल-जल योजना का कार्य सभी वार्डो में शुरू कर दिया गया है, पर जैसे-तैसे कार्य की शिकायतें मिल रही हैं। जिला स्तर से अब तक जांच में शामिल तकनीकी दल निर्माण एजेंसी के बचाव में खड़ा हो जाता है, नतीजा किसी गड़बड़ी करने वालों से न तो पैसे की वसूली की कार्रवाई हुई नहीं प्राथमिकी दर्ज की जा सकी।

इन गांवों में आर्सेनिक अधिक

पटना जिले का मनेर, दानापुर, फतुहा, खुसरूपुर, बख्तियारपुर, पंडारक और मोकामा गंगा नदी के किनारे बसा है। इन प्रखंडों में गंगा किनारे के गांवों में आर्सेनिक अधिक है। इन जगहों पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को डीप बोरिंग व पंप में नई तकनीक का उपयोग करना है, ताकि सेहत के लिए अनुकूल पानी की गुणवत्ता हो। जहां सामान्य बोरिंग का पानी पीने योग्य मिल रहा है, वहां वार्ड कार्यान्वयन समिति को नल-जल का कार्य सौंपा गया है।

कहीं नहीं है बिजली कनेक्शन

पटना जिले में नल-जल के तहत दो लाख 93 हजार 441 घरों को पेयजल सुलभ कराने का लक्ष्य 31 दिसंबर तक रखा गया है। पर ताजा रिपोर्ट के अनुसार जिले में 2647 वार्डो में कार्य शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार 1506 वार्डो में कार्य पूराकर लिया गया है पर कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं तो कहीं टावर बिना बोरिंग चालू करा दिया गया है। जिले में 223 वार्ड ऐसे हैं, जहां अब तक कार्य शुरू नहीं हो सका है।

चीयर्स डेस्क 

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