शराब डिलीवरी जैसी आपराधिक घटनाओं की ओर नौनिहाल बढ़ा रहे कदम

1996 में रिलीज हुई मासूम फिल्म के गाने के बोल ‘छोटा बच्चा समझ के हमसे ना टकराना रे…’ आज की हकीकत बयां कर रहा है। शहर में होने वाली आपराधिक वारदातों में किशोरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसने पुलिस को बेचैन कर दिया है। पुलिस गंभीर अपराधों में शामिल किशोरों का न्यायालय में सोशल ऑडिट रिपोर्ट देती है। जिस आधार पर उन किशोरों को सुधार गृह भेज दिया जाता है। लेकिन वहां से निकलने के बाद ये फिर से अपराध को अंजाम देने लगते हैं।

नहीं हो रही सही काउंसिलिंग

बाल सुधार गृह भेजे जाने वाले किशोरों की सही काउंसिलिंग नहीं हो रही है। इस कारण वे सुधार गृह में समय पूरा कर निकलने के बाद दोबारा से अपराध को अंजाम देना शुरू कर देते हैं। हालांकि जब भी सुधार गृह में जांच टीम आती है तो वहां की व्यवस्थाएं ऐसी दिखाई जाती है, जिससे कोई भी प्रभावित हो जाता है।

बाइक चोरी और शराब डिलीवरी में शामिल हैं सबसे ज्यादा किशोर

जिले में सबसे ज्यादा किशोर बाइक चोरी और शराब डिलीवरी में शामिल हैं। एक अनुमान के मुताबिक शराब डिलीवरी और बाइक चोरी के लिए पूरे जिले में दर्जनों किशोर सक्रिय हैं। कुछ माफिया सरगना किशोरों को एकजुट कर आपराधिक गिरोह चला रहे हैं। वे किशोरों से चोरी, लूट और छिनतई की घटनाओं को अंजाम दिलाते हैं। इसके बदले उन्हें मोटी रकम देते हैं।

आशीष भारती (एसएसपी भागलपुर) ने कहा कि बच्चों की बेहतर काउंसिलिंग के लिए कोतवाली परिसर में ‘बाल मित्र थाना’ खोला गया है। जहां विधि विरुद्ध बच्चों की बेहतर काउंसिलिंग की व्यवस्था है। ऐसे बच्चों की संख्या में हो रही वृद्धि रोकने के लिए रणनीति बनेगी। ताकि उन्हें भटकाव से रोका जा सके।

चीयर्स डेस्क 

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