शराब की सैंपलिंग का राजस्थान सरकार ने नहीं दिया अधिकार

ब्रेवरेज उत्पादों व शराब के नमूनों की जांच करने का अधिकार एफसीसीआई को मिलने के बाद भी राजस्थान में अभी तक एक भी ब्रांड की शराब या वाइन का नमूना नहीं लिया जा सका है, जबकि शराब और ब्रेवरेज को खाद्य सुरक्षा के दायरे में आए आठ महीने से ज्यादा समय हो चुका है। शराब व बियर समेत अन्य एल्कोहल उत्पादों के नमूने नहीं लेने के कारण शराब निर्माता खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। इसमें ये भी दिलचस्प है कि शराब निर्माता कंपनियों ने खाद्य सुरक्षा में पंजीकरण करवा लिया है और वे शराब की बोतलों पर एफएसएसआई नंबर भी लिखने लगी हैं, लेकिन शराब बेचने के लिए खोले गए एक भी ठेके के लिए खाद्य सुरक्षा लाइसेंस नहीं लिया गया है।

केन्द्र सरकार के फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने जनवरी में ही ब्रेवरेज उत्पादों खाद्य वस्तुओं में शामिल कर लिया था। अथॉरिटी के सीईओ पवन अग्रवाल ने मानक तय करते हुए एक अप्रैल 2019 से शराब और  ब्रेवरेज के नमूने लेने के आदेश दिए थे। शराब के साथ बियर, रम और व्हिस्की समेत तमाम एल्कोहल और नॉन एल्कोहल आदि  उत्पादाें के सैंपल लिए जाने थे, ताकि यह सामने आ सके कि संबंधित उत्पादों में एल्कोहल की मात्रा के के अलावा रसायन, कलर, शुगर आदि की मात्र कितनी है।

यहां हो रही है कार्रवाई : राजस्थान में ब्रेवरेज उत्पादों की खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार कोई जांच नहीं की जा रही है, जबकि हरियाणा, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, आसाम समेत कई प्रदेशों में शराब के नमूने बड़े स्तर पर लिए जा रहे हैं। नमूने लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग के फूड सेफ्टी कमिश्नर को इसका फैसला लेना था, लेकिन चिकित्सा विभाग की फूड सेफ्टी विंग को अभी तक जांच के आदेश नहीं दिए हैं।

कवायद भी सफल नहीं हुई

फूड सेफ्टी एक्ट कानून में बदलाव से चिकित्सा विभाग को शराब में मिलावट की जांच के अधिकार दिए गए। लेकिन राजस्थान आबकारी विभाग जांच का अधिकार खुद के पास सुरक्षित रखना चाहता है। इसे लेकर एक्साइज इंस्पेक्टर को ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनाने की चर्चा हुई। लेकिन इसमें एफएसएसआई के नियम आडे आ रहे है। फूड सेफ्टी एक्ट में तय मापदंडों की योग्यता पूरी करनी होती है।

सैंपलिंग क्यूं है जरूरी

1. विभिन्न ब्रांडों की शराब, वाइन, बीयर और अन्य ब्रेवरेज उत्पादों में एल्कोहल की मात्रा काे लेकर सवाल उठते रहे हैं। वहीं इथाइल और मिथाइल अल्कोहल के मिश्रण काे लेकर शराब निर्माता जांच के दायरे में आते रहे है।

2. बीयर और ब्रांडी के साथ शराब के प्रमुख ब्रांडों की क्वालिटी की जांच हो सकती है।

3. ब्रेवरेज प्रोडेक्ट के लेबल पर किए गए दावों की सत्यता जांचने जांच हाे सकती है।

4. शराब में पानी व सस्ती शराब में मिलावट काे लेकर काेई भी जांच करवा सकता है।

चीयर्स डेस्क

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