यहां मिल रहा है हवा से सोखा गया पीने का पानी

तेलंगाना के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक हवा से बनाया गया पानी मिल रहा है। इस पानी को एक ख़ास तरह की तकनीक से बनाया जाता है। जिसे मेघदूत के नाम से जाना जाता है। इस बॉटल की कीमत आठ रुपए है लेकिन अगर ग्राहक अपनी बॉटल में पानी लेता है तो उसे पांच रुपए देने होते हैं। हवा से पानी कैसे निकलता है ये सोच कर आप भी कुछ असमंजस में होंगे ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह से हवा से पानी निकाल कर उसे बेचा जाता है।

मेघदूत तकनीक को मैत्री एक्वाटेक ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत विकसित किया है। हर मौसम में काम कर सकती है। मशीन हवा से सीधे पानी सोखती है और कई चरणों से गुजरने के बाद पानी टैंक में जमा होता है।

इस तरह बनता है हवा से पानी सबसे पहले हवा का बहाव मशीन से गुजरता है, जहां उसमें मौजूद डस्ट पार्टिकल समेत दूसरे प्रदूषक तत्वों को सोख लिया जाता है। मशीन से छनकर निकलने वाली हवा सीधे कूलिंग चैंबर में जाती है, जहां इसे अत्यधिक (कंडेंस) ठंडा किया जाता है। यहीं कंडेस्ड एयर पानी की बूंद में बदलती है। इसके बाद बूंद-बूंद जमा होती है।

जमा हुआ पानी भी कई स्तर पर फिल्टर होता है। इससे पानी में मौजूद दूसरे प्रदूषक तत्व हट जाते हैं और पानी शुद्ध हो जाता है। इस पानी को भी अल्ट्रा यूवी-रे वाले सिस्टम से गुजारा जाता है। इसके बाद पानी पीने लायक हो जाता है।

चीयर्स डेस्क 

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