मार्टिन्स काॅर्नर बिन अधूरी है गोवा की सैर !

साफ सुथरा, व्यवस्थित और अनुशासित रेस्ट्रां, हल्की सी म्यूज़िक और भीना भीना सा समां। ज्यादातर टेबल्स पर खूबसूरत जोड़े या आधुनिक पश्चिमी पोशाक पहने लड़कियां। धीमे लहजे की लय के बीच गोवा के व्यंजनों की उड़ती खुश्बू और साथ में बीयर, वाइन, वोदका या स्काॅच के पैग।

ये है मार्टिन्स कार्नर रेस्ट्रां, दक्षिण गोवा के बेटल बाटिम में एक रेस्ट्रां जो गोवा की पहचान बन चुका है। कई बार इसे गोवा के लीजेंड के रूप में भी पेश किया जाता है। अमिताभ बच्चन और विद्या बालन से लेकर सचिन तेंदुलकर तक, जो भी गोवा आता है वो यहां आना जरूरी समझता है। सचिन तेंदुलकर तो इस रेस्ट्रां के इतने दीवाने हैं कि जब तब आते रहते हैं। रिटर्न गिफ्ट के रूप में इस रेस्ट्रां ने सचिन को जो डिश सबसे ज्यादा पसंद है, सचिन के नाम से ही सर्व की जाती है।

सी फूड में किंग क्रैब हो या फिर पोर्क, सब कुछ है यहां। गोवा के मसालों से तैयार झींगे से लेकर किंग फिश तक, और तो और शार्क भी यहां प्लेट में मौजूद मिलेगी ढेर सारे मसालों में लिपटी हुई, लेकिन टुकड़ों में। लाॅबस्टर समेत तरह तरह के प्राॅन के पकवान और साथ में शराब। मार्टिन की एक खासियत इसका फुल बाॅर भी है। यहां मैक्सिकन कोरोना बियर समेत बाकी हर ब्रांड की बियर भी।

Story-of-Martin's-corner

यहां बियर जग में भी मिलती है, यूरोपीय देशों की तर्ज पर। एक जग किंगफिशर बियर यहां 350 रुपए की मिलती है, जिसे तीन लोग बड़े आराम से पी सकते हैं। इसके अलावा विदेशी जिन और वोदका के बेहतरीन ब्रांडस भी मार्टिन के बाॅर में मिलते हैं। दिन भर समुंदर के साहिल यानी बीच पर मस्ती करने के बाद शाम को मार्टिन्स काॅर्नर में खाने और पीने का लुत्फ वाक़ई एक जबर्दस्त तजुर्बा होता है। अनुज जायसवाल लखनऊ के है, यहां उन्हें तंदूरी रोटी और पनीर की सब्जी मिली गोवा के मसालों के साथ। रोशन तमिलनाडु से आए हैं, वो बियर के साथ फिश फिंगर खाकर बहुत खुश हैं।

मार्टिन्स काॅनर के इर्द गिर्द ऊंचे नारियल के पेड़ों के झुंड और तरह तरह के दूसरे पेड़ पौधे यहां की फज़ा को और दिलकश बना देते हैं। गोवा की गवंई सुगंध में लिपटा आधुनिक परिवेश में विकसित ये रेस्ट्रां एक खास अनुभूति देता है। वैसे तो पूरे गोवा और विशेषकर दक्षिणी गोवा में अभी पुर्तगीज़ काल के मकान और बसावट दिखती है। हरे भरे ऊंचे आसमान से लगे पेड़ों के बीच घरों और रेस्ट्रां का होना यूरोप की याद दिला देता है। मार्टिन्स कार्नर में खाना और पीना कुछ कुछ यूरोपीय अहसास का भी नाम है।

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इसके वजूद में आने की कहानी बड़ी दिलचस्प है और शुरु होती है नब्बे के दशक के अंतिम वर्षों में जब मिस्टर मार्टिन रिटायर हुए। उससे पहले ये एक छोटी सी दुकान हुआ करती थी जहां आस पास के लड़के कैरम खेलने आते थे और साॅफ्ट ड्रिंक्स भी लेते थे। फिर मिसेज मार्टिन परेरा ने यहां गोवा की डिशेज़ जैसे कि साॅरपाटेल, पोर्क चिली और गोवा सासेज़ परोसना शुरु किए। ड्राइवरों ने यहां विदेशी सैलानियों को लाना शुरु किया और देखते ही देखते इसने लोकप्रियता के शिखर को छू लिया। इसके मालिक जाॅय परेरा इसकी सफलता पर चियर्स डाॅट काॅम से बातचीत में भी सिर्फ मुस्कुराते भर हैं। हमेशा काम में व्यस्त रहने वाले परेरा अपने रेस्ट्रां की क्वालिटी पर बहुत ध्यान देते हैं। हालांकि पिछले तीन चार वर्षों में यहां आने वाले सैलानियों के व्यवहार में कुछ बदलाव भी आया है लेकिन परेरा इस पर भी कुछ नहीं बोलते और रेस्ट्रां के बाॅर के पास चुपचाप खड़े होकर काम देखते रहते हैं।

रश्मि अस्थाना

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