भविष्य में पीने का पानी होगा तेल की कीमतों से ज्यादा महंगा

हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला के ग्लेशियर इस सदी के अंत तक पिघल कर एक तिहाई हो जाएंगे। इससे अफगानिस्तान से म्यांमार तक फैले 800 किलोमीटर लंबे हिंदूकुश-हिमालयी क्षेत्र  से जुड़े देश सर्वाधिक प्रभावित होंगे। ग्लोबल वॉर्मिग व जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को देखते हुए इसकी चेतावनी भी वैज्ञानिकों ने जारी कर दी है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड मांउनटेन डेवलपमेंट के महानिदेशक डेविड मोल्डेन ने कहा है कि अगर जलवायु परिवर्तन को रोके लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में मानवजाति पर संकट मंडराना तय है। इससे निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में संभव है कि लोगों की पीने के पानी तक पहुंच तेल की कीमतों से भी अधिक हो जाए।

पृथ्वी का ‘तीसरा ध्रुव’ कहे जाने वाले हिंदूकुश-हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों पर दक्षिण और दक्षिणपूर्वी एशिया के अरबों लोगों का जीवन निर्भर करता है। ब्रह्मपुत्र, सिंधु, यांगत्जे और मेकोंग जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम इसी क्षेत्र से होता है। आने वाले समय में जब इन नदियों में पानी नहीं होगा तो भारत, चीन, पाकिस्तान समेत अन्य देश के लोगों का क्या हाल होगा, इसे आसानी से समझा जा सकता है।

तेल की कीमतों से ज्यादा महंगा होगा पीने का पानी

अत्यधिक गर्म हवाएं, अनियमित मानसून और प्रदूषण के कारण पानी के उद्गमों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। यदि इससे निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में संभव है कि लोगों की पीने के पानी तक पहुंच तेल की कीमतों से भी अधिक हो जाए। यह इतना मूल्यवान बन गया है कि लोग इसके लिए लड़ने के लिए भी तैयार रहते हैं।

आइसीआइएमओडी के महानिदेशक ने कहा, ‘ 2015 में हुआ पेरिस समझौता ग्लोबल वार्मिग के सबसे बुरे प्रभावों को रोकने के एक प्रभावी माध्यम हो सकता है। बशर्ते सभी देश मिलकर इस दिशा में काम करें।’

चीयर्स डेस्क 

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