बिना हथियार शराब तस्करों पर वार

बिहार सरकार शराब बंदी कर अपनी पीठ भले ही थपथपा रही हो लेकिन इस आदेश को अमल में लाने वाले उत्पाद विभाग अपने दोनों खाली हाथों से शराब तस्करों से मुकाबला कर रहे हैं।  बिहार में शराब बंदी के बाद से ही शराब की तस्करी बहुत बढ़ गई है। शराब तस्कर भी इस बंदी में फायदा उठा रहे हैं हरियाणा और यूपी से शराब को ला कर बिहार में ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।  शराब बंदी पूरी तरह से लागू रहे इसका जिम्मा सूबे के उत्पाद विभाग पर है, और उत्पाद विभाग है कि सूबे में बिना हथियार ही शराब तस्करों पर वार किए जा रहा है। शराबबंदी के बाद से तस्कर खाली हाथ से सशस्त्र हो गए, लेकिन उत्पाद विभाग की टीम को लाठी तक नसीब नहीं हुई। उत्पाद विभाग की टीम हर मुश्किल को चुनौती देने के लिए तो तैयार रहती है, लेकिन संसाधनों की कमी से मार खा जाती है।

सुरक्षा को लेकर खतरा 

उत्पाद विभाग के निरीक्षकों को हमेशा जान का खतरा बना रहता है। वे जब भी किसी छापेमारी में जाते हैं साथ में पुलिस बल भी नहीं हो पाती है। हालांकि विभाग को सैप के जवान दिए गए हैं, फिर भी खतरा बना रहता है। निरीक्षकों का कहना है कि अचानक से सूचना मिलती है और तत्काल छापेमारी करनी होती है। ऐसे में अगर सैप के जवानों को साथ लेकर जाने का इंतजार किया जाए तो काफी देर हो जाती है। शराब तस्कर थोड़ा भी देर नहीं लगाते और शराब को  ठिकाने लगा देते हैं। ऐसी ही छापेमारी में कई बार हमले हुए हैं।

दानापुर में भी टीम की जान मुश्किल में 

अक्तूबर माह में उत्पाद विभाग की टीम दानापुर क्षेत्र में छापेमारी के लिए निकली थी। इस कार्रवाई में 103 कार्टन शराब तो बरामद की गई, लेकिन शराब तस्कर पूरी तरह से हथियारों से लैस थे। घटना बड़ी हो सकती थी, लेकिन उस वक्त उत्पाद विभाग की टीम ने किसी तरह से जान बचाई। छापेमारी के दौरान उत्पाद विभाग ने तस्करों के पास से एक राइफल और पांच कट्टा भी बरामद किया था। शराब के साथ-साथ तस्कर हथियार का भी काम कर रहे थे। ऐसे में उनके ठिकानों पर बिना हथियार के छापेमारी जान पर खेलने जैसा था। दानापुर में भी गन की फैक्ट्री के साथ शराब की खेप पकड़ी गई थी।

बिना हथियार पुलिस को मात 

पटना पुलिस ने वर्ष 2019 में शराब के साथ चल रही एक भी गन फैक्ट्री नहीं पकड़ी है, जबकि उत्पाद विभाग ने पिछले छह माह में आधा दर्जन से अधिक ऐसे गोदामों को पकड़ा है जहां शराब के साथ हथियार बनाने का भी काम चल रहा था। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराब के तस्कर कितने खतरनाक हैं और उन्हें मात देना कितनी बड़ी चुनौती है।

चीयर्स डेस्क 

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