बचा पानी आंसू बहाने, डूब मरने के काम आता है

भारत में पानी के स्वयं सूखने के गुण के कारण सरकार को उसके भंडारण की चिंता नहीं रहती। फिर भी बाल्टी, पाइप, नल और टंकी बनाने के उद्योगों को पानी प्रेरणा देता है

सरकार पानी की महत्ता और मूल्य समझने के लिए कुछ करने वाली है। जब सरकार कुछ करने वाली होती है, तब वह बहुत कुछ करने से लेकर कुछ नहीं करने तक कुछ भी कर सकती है। इसीलिए घोषणा होने के बाद संदेह उत्पन्न हो जाता है कि कहीं वह काम वास्तव में न हो जाए। सरकार का विचार है कि अधिकांश भारतवासी पानी के महत्व और कीमत को नहीं समझते। जो घंटों पानी के लिए यहां-वहां दौड़ते हैं, मीलों से घड़ा उठाकर लाते हैं, नल पर लड़ते-झगड़ते हैं, टैंकर के लिए क्यू लगाकर खड़े रहते हैं, वे भारतवासी पानी के महत्व को न समझते हों, इस बात पर विश्वास नहीं होता। पर सरकार कहती है तो कहीं से सुनकर ही कहती होगी। मेरे लिए तो अभी यही प्रसन्नता का विषय है कि पानी पर निबंध लिखने के स्कूली दिन लौट आए।

पानी का भारतवर्ष में बहुत उपयोग होता है। जो महानुभाव नीट व्हिस्की नहीं पीते, वे गिलास में पानी मिलाते हैं। इसकी बर्फ जमाकर भी गिलास में डाली जाती है जो मरीज के माथे पर रखने के अलावा कुल्फी बनाने के काम आती है। लोग बर्फ को वापिस पिघलने देकर पानी प्राप्त करते हैं। पानी को चूल्हे पर रखकर भाप बनने दी जाती है, ताकि बादल तैयार हो सकें। पानी छिड़कने के काम आता है। लोग इससे घास गीली करते हैं या फर्श धोते हैं। रेलमंत्री के आगमन पर बीस वर्ष में एक बार पूरा प्लेटफार्म इससे धोया जाता है। शेष पानी से रेलवे की चाय बनती है। दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए दूध में पानी मिलाया जाता है। सरकारी अस्पतालों में सप्लाई करने के लिए इसके इंजेक्शन तैयार होते हैं। पानी टैंकरों में भरकर अफसर या मंत्री की लड़की की शादी में जाता है। पानी कम होने पर आग बुझाने के काम आता है। लोग पानी को फ्लश में भरकर जंजीर खींचकर बहाते हैं।

थोड़ा मनीप्लांट में डालते हैं, थोड़ा फ्लावर-पॉट में रखते हैं। पानी शेव करने में सहायक होता है और नाई की दुकान पर इसकी खपत होती है। पानी से शिवमंदिर में अभिषेक होता है। नमाज के पहले वजू करते हैं। मोहल्लों और राज्यों को परस्पर लड़ाने के अतिरिक्त पानी उद्योगों में बहुत काम आता है। कारखाने इसमें कैमिकल और जहर मिलाकर भारतीय नदियों में बहाते हैं। पानी हिंदी फिल्मों में हिरोइन को भिगोने और गीली करने में उपयोग होता है। टीवी पर साबुन के विज्ञापनों में पानी की काफी खपत है।

इसके फव्वारे बनते हैं, जो फाइव स्टार होटल से लेकर दिल्ली के कनाट प्लेस तक शोभा बढ़ाने में उपयोगी होते हैं। धोबी प्रेस करने से पहले इसे कपड़ों पर छिड़कते हैं। पानी बहुत अधिक या बहुत कम हो, तो चंदा बटोरने और राजनीति करने में मदद करता है। पानी यदि कुंए में हो तो वह हिंदू धर्म में हरिजनों को अलग करने में योगदान देता है। उत्तर भारत में पानी दाल पतली करने और दक्षिण भारत में कॉफी के अतिरिक्त रसम बनाने के काम आता है। बंगाल में लोग इसे मछली पालने के काम में लाते हैं। पानी बहुतायत से कारें धोने के काम आता है।

भारत में पानी के स्वयं सूखने के गुण के कारण सरकार को उसके भंडारण की चिंता नहीं रहती। फिर भी बाल्टी, पाइप, नल और टंकी बनाने के उद्योगों को पानी प्रेरणा देता है। भारत में पानी जमा हो जाने की संभावना समुद्र तक सीधे पहुंचाने के पर्याप्त साधनों के कारण कम हैं, जैसे नदी आदि। सरकार भारतवासियों को पानी से चिंतित रखना चाहती है, ताकि वे तोपों की चिंता छोड़ दें। भारत में अधिकांश पानी दो-तीन माह तक कीचड़ करने में सहायक होता है। इससे दलदल बनते हैं, जिससे मलेरिया होकर डॉक्टरों में फैली बेरोजगारी कम करता है। पानी बिना सब शून्य से यही तात्पर्य है।

इन सारे उपयोगों के बाद जो पानी बच रहता है, वह शरीर के रक्त को बहता रखने, आंसू बहाने, डूब मरने आदि के काम आता है। हां, इसके अलावा पानी को पिया जाता है और उससे सिंचाई होती है। कई लोग कई बार पानी-पानी हो जाते हैं, फिर भी कम पड़ता है।

शरद जोशी 

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