पीने का पानी कर रहा लोगों को बीमार, जिम्मेदार बेख़बर

राजस्थान के बांसवाडा जिले में कई लोग  पीने के पानी के कारण बीमार हो गए हैं। खबर के मुताबिक जिले के अधिकतर गांव में पानी में फ्लोराइड पाया गया है, जिससे लोग इसे पीने के बाद बीमार हो रहे है। इसका ताजा मामला गढ़ी विधानसभा क्षेत्र के रोहिड़ा गांव में देखने को मिला। इस गांव में पानी में फ्लोराइड मिला हुआ आ रहा है जिस कारण से यहा के लोग बिमार हो रहे हैं। लोगों की मानें तो इस गांव में यह समस्या सालों से चली आ रही है। यहां पर लगे हैंडपंपों से भी फलोराईड युक्त पानी निकल रहा है जो लोगों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया की इस पानी के कारण बुजुर्गो से लेकर सभी के गुठनों में दर्द होने लग गया है। वहीं, लोगों को पेट भी खराब होने लग गया है। कितना भी इलाज कराओं पर फ्लोराइड का पानी इसे सही नहीं होने दे रहा है। इतना ही नहीं, यहां पर पानी में फ्लोराइड इतनी बडी मात्रा में है कि किसी मटके पानी से भरकर रखो तो उसके बाहर सफेद सफेद दाग पड़ जाते है। जिससे साफ पता चल जा रहा है कि यहां के पानी में कितना फलोराइड है।

ये तो एक गांव की कहानी है, लेकिन जिलो के और गांवों की सूरत भी कोई खास अच्छी नहीं है। यहां के ग्रामीणों को सरकार से उम्मीद है कि सरकार इस पूरे मामले में कुछ करे ताकि इस गांव को फ्लोराइड वाले पानी से मुक्ति मिल सके।

फ्लोराइड नाम उस यौगिक समूह को दिया गया है जो फ्लोरीन से बने प्राकृतिक तत्व होते हैं। फ्लोराइड पानी और मिट्टी में विभिन्न स्तरों पर मौजूद होते हैं। 1940 में वैज्ञानिकों ने पाया था कि जहाँ पानी में फ्लोराइड की मात्रा पानी के एक मिलियन हिस्से में एक से अधिक होती है वहाँ के लोगों के दाँत में कैविटी ज्यादा जमती है बनिस्पत ऐसे इलाकों के जहाँ पानी में फ्लोराइड की मात्रा इससे कम होती है। बाद के कई अध्ययनों ने इस बात को प्रमाणित किया है।

आने वाले वक्त में यह भी पता चला कि फ्लोराइड दांतों की सुरक्षा कर सकता है और उसे बैक्टीरिया से भी बचा सकता है। यह बैक्टीरिया मुंह में अम्ल बनाता है और खनिज तत्वों को नुकसान पहुँचाता है, जिससे दांतों पर एनामेल फिर से बनते हैं और यह घिसने लगता है।दांतों के निर्माण के साथ-साथ यह हड्डियों में भी घुलने लगता है।

फ्लोराइड का सेहत पर प्रभाव

पूरे जीवनकाल में फ्लोराइड के अत्यधिक सेवन के कारण वयस्कों की हड्डियां टूटने लगती हैं और उन्हें दर्द और थकावट का अहसास हो सकता है। आठ साल तक के बच्चे अगर फ्लोराइड का अत्यधिक सेवन करें तो उनके दाँत बदरंग हो सकते हैं और उन पर गड्ढे हो सकते हैं। यहाँ फ्लोराइड के तमाम स्वास्थ्य सम्बन्धी प्रभावों का जिक्र नहीं है, यह सिर्फ आमलोगों को सूचित करने का प्रयास है कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने का सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

 पानी में फ्लोराइड कैसे आ जाता है?

कुछ फ्लोराइड यौगिक, जैसे सोडियम फ्लोराइड और फ्लोरोसिलिकेट पानी में आसानी से घुल जाते हैं और यह चट्टानों के बीच बने छिद्र से भूजल तक पहुंच जाते हैं। कई जगह पानी की आपूर्ति में भी प्राकृतिक रूप से उपस्थित फ्लोराइड होते हैं। उर्वरक और एल्यूमीनियम फैक्टरी के अवशिष्ट जल के भूजल में मिलने से भी पानी फ्लोराइड युक्त हो सकता है। कुछ देशों में दाँत को स्वस्थ बनाने के लिये भी पानी में फ्लोराइड मिलाया जाता है।

चीयर्स डेस्क 

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