पानी बचाने के लिए इज़राइली तकनीक अपनाएगा भारत

भारत, इजराइल से पानी बचाने के नए तरीके सीखेगा। भारत ने जल प्रबंधन मुद्दों से निपटने में इजराइल के सहयोग की मांग की है। पानी पर भारत-इजराइल सामरिक भागीदारी के बारे में चर्चा के दौरान एक सभागार को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जल प्रबंधन को लेकर भारत के मुद्दों को रेखांकित किया।

17 से 19 नवंबर के बीच इजरायल की तीन दिन की यात्रा दौरान शेखावत ने कहा कि चलो एक साथ पारंपरिक सोच से थोड़ा हटकर कुछ नया करें और सभी बाधाओं के खिलाफ लड़ने के लिए एक-दूसरे की मदद करें। आइए एक साथ जीवन बचाने, पानी बचाने और इस धरती को बचाने के लिए एक तालमेल बनाने के लिए साथ आते हैं।

उन्‍होंने कहा कि मेरे विचार में पानी के उपयोग की दक्षता, नमकीन पानी को पीने योग्‍य बनाना, अपशिष्ट जल और अपशिष्‍ट जल का पुन: उपयोग, प्रदूषण उन्मूलन, तकनीकी हस्तक्षेप आदि के क्षेत्र में इजरायल और भारत के बीच द्विपक्षीय सहयोग हमारे दोनों महान राष्ट्रों के लिए बहुत मददगार होगा।

शेखावत ने कहा कि पानी हमारी सरकार के फोकस क्षेत्रों में से एक है क्योंकि पानी की कमी से जुड़े खतरे का स्तर हर गुजरते दिन बढ़ता जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण जैसे कारक जल संसाधनों पर बहुत दबाव डाल रहे हैं जो हमारे पानी के प्रबंधन को एक बड़ी चुनौती बना रहे हैं।

नमकीन पानी को शुद्ध करने में इजरायल की विशेषज्ञता को देखते हुए मंत्री ने इस क्षेत्र में संभावित सहयोग के लिए संकेत दिया कि भारत भी समुद्री जल की प्रचुर उपलब्धता के साथ 7500 किमी से अधिक तटीय क्षेत्र में है। उन्‍होंने जोर दिया कि हमारे तटीय बस्तियों के लिए नमकीन जल एक वरदान हो सकता है और पीने के पानी की समस्या को काफी हद तक दूर कर सकता है।

इजराइल के ऊर्जा और जलसंसाधन मंत्री युवल स्टीनिट्ज ने कहा कि भारत और इजराइल के बीच संबंध सहयोग के एक नए स्तर पर पहुंच गए थे जो पहले से बेहतर हैं और जल प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग आगे भी बढ़ सकता है। उन्‍होंने कहा कि भारत और इजरायल के बीच ढाई दशक से विशेष और अनूठे संबंध हैं, जिसमें मिसाइल, रक्षा, वायु रक्षा, खुफिया और कई क्षेत्रों में बहुत ही उपयोगी और सफल सहयोग शामिल है। मुझे विश्वास है कि जैसे हम पानी के साथ एक नया अध्याय शुरू करेंगे। हम ठीक उसी तरह से एक सफल और सफल सहयोग स्थापित कर पाएंगे, जैसा हमने रक्षा के क्षेत्र में किया है।

चीयर्स डेस्क 

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