नये साल की मस्ती में खलल डाल सकती है शराब !

शराब माफिया प्रदेश में अंग्रेजी व देशी शराब की दुकानों पर भारी मात्रा में नकली शराब बेचने के फिराक में हैं। ये माफिया सेल्स मैन व दुकानदारों की मिलीभगत से अधिक मात्रा में बिकने वाले ब्राण्ड में व्यापक पैमाने पर नकली शराब की बाजार में लाकर जहां एक तरफ मालामाल होंगे वहीं दूसरी तरफ इसका सेवन करने वालों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे सरकार को भी भारी राजस्व की हानि हो रही है।शराब माफिया लगातार इस जुगत में रहते हैं कि जिस समय शराब की खपत ज्यादा होने की संभावना रहती है उस समय बाजार में नकली शराब की खेप पहुंचाने में सफल हो जाते हैं।

पिछले दिनों आबकारी व एसटीएफ ने कई स्थानों पर छापेमारी कर नकली व प्रदेश की बाहर की शराब पकड़ी थी। आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वीकारा भी था कि हरियाणा व पंजाब आदि प्रदेश से शराब लाकर यूपी में बेची जा रही है। शराब के बिक्री रेट पर ध्यान दिया जाय तो प्रदेश में अन्य राज्यों की अपेक्षा शराब की कीमत ज्यादा है। यहां पर शराब की दुकानों को लाटरी के माध्यम से दिया जाता है।

सभी दुकानों की लाइसेंस फीस व एक साल में शराब उठान (खरीदारी) का कोटा फिक्स कर दिया जाता है। ऐसे में प्रदेश में बहुत सी ऐसी दुकानें हैं जहां पर शराब की बिक्री अधिक है लेकिन कोटा कम है। कम कोटे की दुकानों के मालिक अपने सेल्समैन के माध्यम बाहर से पैकिंग की गयी शराब को लाकर दुकान में रख लेते हैं। सेल्समैन ग्राहकों को देखकर बाहर की पैकिंग शराब बेचते हैं। उन शराब की बोतलों में भी फर्जी होलोग्राम लगे होते हैं।

ऐसे में समझ में नहीं आता कि आम आदमी इस डुप्लीकेट शराब से कैसे निजात पायेगा। इसी तरह प्रदेश की अनेक शराब की दुकानों पर अंग्रेजी शराब की क्वार्टर, हाफ व बोतल की जो पैकिंग होती है वह वास्तविक कम्पनी की तरह नहीं होती है। यही वजह देशी शराब जो प्लास्टिक के बोतल में आती है उसमें भी भारी पैमाने पर मिलावट कर नकली शराब बेचने का कार्य किया जा रहा है। इस तरह की शराब ड्रमों में भरकर प्रदेश के कुछ चुनिंदा जगह पर लायी जाती है, जहां बाद में पैकिंग मशीन से पैककर फर्जी होलोग्राम लगा दिया जाता है। फिलहाल इस धंधा से प्रदेश सरकार को करोड़ों का आबकारी टैक्स की चपत लगायी जा रही है।

चीयर्स डेस्क 

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