नमामि गंगा परियोजना की खुली पोल

यूपी में सरकार खुश रहे, इसलिए अफसर गंगा की सफाई के लिए सिर्फ कागजी काम पूरा करते रहे,और यही कारण है कि जिस गंगा के पानी से करोड़ों लोगों की प्यास बुझती है, उसी गंगा की गोद में गिरने वाली गंदगी और जहर को रोकने के लिए अफसर जमीनी काम तक पूरा नहीं कर पाए। कानपुर में अधूरी कार्ययोजना बनी तो उन्नाव उससे भी आगे निकला। यहां योजना बनी लेकिन उस पर अमल ही नहीं हुआ। अब जब पांच राज्यों के मुख्यमंत्री और दस केंद्रीय मंत्रियों के साथ नमामि गंगे की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री आ रहे हैं, तब आनन-फानन में तैयारियां हो रही हैं। ये तैयारियां ही पोल खोल रही हैं।

पीएम के दौरे के लिए कानपुर में गंगा की ‘धुलाई’ में बहाया गया कचरा उन्नाव के अनवरत बहने वाले कचरे के साथ गंगा में बहता हुआ आगे जा रहा है। गंगा और पांडु के संगम से थोड़ा पहले बक्सर में दोनों जिले से बहाए गए ये पाप उतरा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कानपुर आने से पहले गंगा को निर्मल-अविरल दिखाने की पूरी कवायद की जा रही है। नरौरा से लेकर बैराज तक, हर स्तर पर गंगा में अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसी ही कवायद उन्नाव में हो रही है। कानपुर सीमा से बांगरमऊ, सफीपुर, सिकंदरपुर सरोसी, सिकंदरपुर कर्ण, बीघापुर और सुमेरपुर ब्लाक से सटे 34 गांवों का सीवेज और गंदा पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। समीक्षा को देखते हुए उन्नाव के अधिकारी अब इसे बंद करने की कवायद में जुटे हैं। कानपुर से बहाई गंदगी उन्नाव के गांवों की यह गंदगी लेकर आगे बढ़ रही है।

उद्योगों का कचरा भी गंगा में: शुक्लागंज और उन्नाव का सीवेज, फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी व औद्योगिक कचरा गंगा में जहर घोल रहा है। बंथर इंडस्टियल एरिया के आगे गहरा गांव के पास जेल ड्रेन में गंदा पानी शहर के सीवेज के साथ औद्योगिक कचरे का सच लेकर बह रहा है। यह नाला जाजमऊ और बक्सर घाट के बीच में गंगा में गिरता है। यहां गंगा की रेती काफी कचरा सोख लेती है।

उन्नाव में 2018 से नमामि गंगे: उन्नाव में दिसंबर 2018 में नमामि गंगे योजना के काम को स्वीकृति मिली। पूर्णता के लिए अक्टूबर 2021 का लक्ष्य मिला। इसमें जल निगम निर्माण खण्ड को दो एसटीपी एक उन्नाव और दूसरा शुक्लागंज में बनाना है, जिनकी लागत 167.35 करोड़ रुपये होगी। एक साल में एक एसटीपी की डिजाइन ही बनी है, जिसे आइआइटी रुड़की ने बनाया है। एक को एनओसी मिली है। डकारी के एसटीपी के लिए कोई काम नहीं शुरू हुआ है। उन्नाव एसटीपी से सिटी ड्रेन को जोड़कर शहर के छोटे-बड़े 48 नालों का पानी शोधन के लिए जाएगा। वहीं, शुक्लागंज में 65.18 करोड़ रुपये से पांच एमएलडी का एसटीपी बनेगा लेकिन यहां जमीन तक तय नहीं हो पाई है। देखी गई जमीनें मानक के अनुरूप न होने पर उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनओसी नहीं दी है।

गांवों का पानी गड्ढे में

प्रधानमंत्री के दौरे के पहले प्रशासन ग्राम पंचायतों में गड्ढे खुदवाकर वहां गंदा पानी इकट्ठा करवा रहा है। पंचायतराज अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि गंगा किनारे के गांवों में गंदा पानी रोकने के लिए वहीं गड्ढे बनवाए गए हैं। नाली का पानी सूखे तालाबों में गिराया जा रहा है। माघ मेले को देखते हुए गंगा में गंदा पानी गिरने से रोकने के लिए ग्राम विकास अधिकारियों को निर्देश दिया गया है।

चीयर्स डेस्क 

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