क्या आप जानते हैं, हाथी के गोबर से भी बनती है ‘जिन’ और ‘बियर’

भारत में मवेशियों में गाय के गोबर को सबसे उपयोगी माना जाता है। यहां हाथी के गोबर से भी कागज और तख्तियां भी बनती हैं।  इंडोनेशिया में हाथी के गोबर से बनने वाली कॉफी 60 हजार रुपए प्रति किलो बिकती है। जापान में हाथी के गोबर से बियर बनाई गई. जिसे चखने वालों ने इसकी काफी तारीफ की। अब अफ्रीका में हाथी के गोबर से शराब बनाई जा रही है, इसका नाम है ‘इंदलोवू जिन। ‘

जुलू भाषा में ‘इंदलोवू’ शब्द का अर्थ होता है हाथी। इसे बनाने वाले दम्पत्ति लैस और पॉवला एंस्ले को यह विचार साल भर पहले आया।  तब इन दोनो को अफ्रीका की सफारी के दौरान गाइड ने बताया कि हाथी जिन फल, फूल और वनस्पतियों को खाता है उनमें से एक तिहाई से अधिक वो पचा नहीं पाता, हाथी की पाचन क्रिया ही ऐसी है।

खाए गए फल-फूल जस के तस हाथी के गोबर के साथ बाहर आ जाते हैं। जंगल के अंदरुनी इलाकों में जहां इंसान नहीं पहुंच पाते हाथी वहां तक विचरण करते हैं। ऐसे में उनके गोबर में पाए जाने वाले वनस्पती भरपूर औषधीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं। लैस एंस्ले ने बताया कि तब उनकी पत्नी के कहा क्यों न हाथियों के इकट्ठा किए गए वनस्पतियों से जिन बनाई जाए।

वैज्ञानिक होने के कारण इस दम्पत्ति को हाथी के गोबर से जिन बनाने में अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ी। जिस सफारी में एंस्ले दम्पत्ति घूमककर आए थे वहीं से इनके हाथी गोबर की पहले खेप आई। इससे बनी का स्वाद थोड़ा तीखा, मिट्टी की सौंधी खुशबू के साथ लकड़ी की गंध भी लिए हुए है, जिसे चखने वालों ने बेहतरीन बताया।

बस फिर क्या था, इस दम्पत्ति ने हाथी के गोबर से बनने वाली इस शराब ‘इंदलोवू जिन’ का उत्पादन शुरू कर दिया। अब यह दोनों खुद गोबर इकट्ठा करते हैं। पांच बड़े बैग में इकट्ठे किए गए गोबर से तीन से चार हजार बोतल शराब बन जाती हैं। गोबर बने हुए हिस्से में से फल, फूल, पत्तियां और पेड़े की छाल अलग कर ली जाती है।

इकट्ठे किए गए वनस्पति को साफ करके सुखाया जाता है। इसके बाद इनका इस्तेमाल जिन तैयार करने में किया जाता है। ‘इंदलोवू जिन’ तैयार होने के बाद इस दम्पत्ति ने सबसे पहले अपने दोस्तों को इसे चखाया। कुछ ने तो साफ इनकार कर दिया जबकि कुछ लोगों को इसका स्वाद पसंद आया। ‘इंदलोवू जिन’ के एक बोतल की कीमत 32 डॉलर यानी लगभग तीन हजार रुपए रखी गई है।

चीयर्स डेस्क 

loading...
Close
Close