केवड़े से पिट गया पतंजलि दिव्य जल

विख्यात योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि आश्रम से निकलने वाली दवाओं के छा जाने के बाद पतंजलि आयुर्वेद ने अब पानी के क्षेत्र में भी अपना ब्रांड ’पतंजलि दिव्य जल’ प्रस्तुत कर दिया है और बाबा के मुरीद इस पानी को दूसरे पानी पर प्राथमिकता भी देने लगे हैं। नोएडा और गाजियाबाद सहित पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में बाबा का दिव्य जल खूब बिकने लगा है। यह पानी भी अन्य पैकेज्ड पानी की तरह ही है। इसकी खासियत सिर्फ इतनी है कि यह दूसरे पानी की अपेक्षा सस्ता है।

पतंजलि दिव्य जल वास्तव में बाजार में  टिके रहने का संघर्ष कर रहा है इसके बावजूद कि बाबा के भक्तों के घरों में पतंजलि के अन्य उत्पादों के साथ इसे भी सप्लाई करने के लिए कहा जा रहा है। लेकिन इस पानी की सभी स्थानों पर सप्लाई ही नहीं हो पा रही थी। करीब दो साल पहले बाबा ने इसकी डिस्ट्रीब्यूटर शिप ऑन लाइन खोली थी। लेकिन सूत्र बताते हैं कि इसमें उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली जितनी की आशा थी। इसके साथ ही पानी बेचने वाले स्थान जिनमें होटल, रेस्टोरेन्ट, बस, रेल और रेसार्ट के अलाव सरकारी दफ्तरों में दिव्य जल के सैम्पल को खासी तवज्जो नहीं मिल पाई।

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास के एक होटल व्यवसायी का कहना है कि बाबा के पानी में केवड़े की खुश्बू या महक ने काम बिगाड़ दिया। उसके अनुसार इस पानी में केवड़े की महक के कारण यह भारी महसूस होता है। इस महक के कारण ही इसे कुछ लोगों ने पहली बार में ही रिजेक्ट कर दिया। गाजियाबाद की गृृहणी सुशीला जैन का कहना है कि बाबा के पानी को हमने इसलिए मंगाया था कि हम लोग बाबा के कई उत्पादों का नियमित इस्तेमाल करते आ रहे हैं। लेकिन बाबा का पानी हम लोगों को पसंद नहीं आया। उनके अनुसार हम पति पत्नी तो कुछ दिन पीते भी रहे लेकिन बच्चों ने इसे पीने से मना कर दिया। बच्चे बड़े हैं और सब पढ़े लिखे हैं, उनके अनुसार पानी जितना स्वच्छ होगा उतना ही हल्का और गंध रहित होगा। पानी में किसी भी प्रकार की गंध या महक को सहन नहीं किया जा सकता। इन बच्चों ने ही इस पानी को हमारे घर से चलता कर दिया।

पतंजलि दिव्य जल के साथ इस समस्या को लखनऊ के एक पानी वितरक ने भी साझा किया कि दिव्य जल के पानी की बोतलों की प्लास्टिक की क्वालिटी भी ठीक नहीं है और इस पानी में जो गंध आती है उसे ग्राहक समझ नहीं पाता है कि यह क्या है। अब जैसे जैसे जागरूकता बढ़ रही है, शुद्धता पर जोर बढ़ रहा है, तो ऐसे में पानी जिसे खरीद कर पीना अभी भी भारतीय समाज में मजबूरी ही समझा जाता है, वहां किसी प्रकार का समझौता करना किसी को मंजूर नहीं है। इसीलिए बाबा का दिव्य जल मार्केट नहीं पकड़ पाया।

चीयर्स डेस्क

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