इस तकनीक से सभी को मिलेगा सुरक्षित और सस्ता पीने का पानी

स्वच्छ पानी के लिए वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। इसके इस्तेमाल से नैनोकार्बन की क्षमता में बढ़ोतरी होती है जिससे पानी से विषाक्त भारी धातु आयनों को आसानी से हटाया जा सकता है। यह नई तकनीक पूरी दुनिया में साफ पानी पहुंचाने के प्रयास में मदद कर सकती है। यह अध्ययन एसीएस अप्लाइड नैनो मैटेरियल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

दरअसल, पानी को साफ करने के लिए कई तरह के नैनोकार्बन का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए पानी से डाई, गैसों, कार्बनिक यौगिकों और जहरीले धातु आयनों को सोख लिया जाता है। ये नैनोकार्बन आण्विक आकर्षण बलों के माध्यम से अपनी सतहों से सीसा और पारे जैसे भारी धातु आयनों को भी सोख सकता है। लेकिन यह आकर्षण बल काफी कम होता है इसलिए ये अपने दम पर ज्यादा कुछ नहीं कर पाते हैं। इसी को देखते हुए सोखने की क्षमता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक नैनोकणों में अणुओं को जोड़ने पर विचार कर रहे हैं। यह अमीनो समूह के तरह किया जाएगा जो भारी धातुओं के साथ मजबूत रासायनिक बंधन बनाते हैं। वे धातु आयन सोखने के लिए नैनोकार्बन पर उपलब्ध सभी सतहों का उपयोग करने के तरीके खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिनमें आंतरिक छिद्र भी शामिल हैं। इससे एक समय में अधिक धातु आयनों को सोखने की उनकी क्षमता बढ़ जाएगी।

नई विधि विकसित की

नागोया विश्र्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इनोवेशन फॉर फ्यूचर सोसाइटी के वैज्ञानिक नागाहिरो सेतो और उनके सहयोगियों ने अमीनो-संशोधित नैनोकार्बन को संश्लेषित करने के लिए एक नई विधि विकसित की है जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में कई भारी धातु आयनों का अधिक कुशलता से सोखने का काम करता है। इसके लिए उन्होंने फिनोल को कार्बन के एक स्त्रोत के रूप में और अमीनो समूह के रूप में एपीटीईस नामक यौगिक के साथ मिश्रित किया गया। में मिश्रित किया, जिसमें एमटीईएस नामक एक स्त्रोत के रूप में एपीटीईएस शामिल था। इस मिश्रण को एक ग्लास कक्ष में रखा गया था और हाई वोल्टेज एक्सपोजर के जरिए एक तरल प्लाज्मा तैयार किया गया। इस विधि का उन्होंने उपयोग किया, उसे सोल्यूशन प्लाज्मा प्रोसेस के नाम से जाना जाता है। इस प्रक्रिया को 20 मिनट तक अपनाया गया और अमीनो-संशोधित कार्बन के काले अवक्षेपकों को एकत्र कर धोने के बाद सूखाया गया।

नैनोकणों में किए गए परीक्षण

अंत में, टीम ने अपने अमीनो-संशोधित नैनोकार्बनों की तुलना पारंपरिक तरीकों से संश्लेषित पांच अन्य तरीकों के साथ की। उनके नैनोकणों में परीक्षण किए गए धातु आयनों के लिए सबसे अधिक सोखने की क्षमता थी। यह दर्शाता है कि अन्य की तुलना में उनके नैनोकार्बन पर अधिक अमीनो समूह हैं। सेतो का कहना है कि उनकी प्रक्तिरियां सभी के लिए सुरक्षित और सस्ता पीने का पानी समान रूप से पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा में मदद करेगी।

चीयर्स डेस्क 

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